उत्तरकाशी, हर्षिल घाटी क्षेत्र में सेब बागवान जंगली जानवरों से खासे परेशान हैं। इस क्षेत्र के सेब उत्पादन वाले गांवों में लंगूर सेब की पेड़ों की टहनियों से नर्म मीठी छाल चट कर रहे हैं। इसके साथ ही पेड़ों को क्षति पहुंचा रहे हैं। कुछ दिनों बाद सेब पेड़ों पर फ्लावरिंग भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में लंगूरों का आतंक से सेब काश्तकार बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।
गंगोत्री घाटी के हर्षिल और उपला टकनौर इलाके में इस बार जबरदस्त बर्फबारी होने से सेब की अच्छी फ्लावरिंग की उम्मीद है। इन सबके बीच काश्तकारों को लंगूरों से फसर को नुकसान पहुंचाने की चिंता सता रही है। हर्षिल घाटी के सुक्की, झाला, पुराली, जसपुर, बगोरी, हर्षिल, धराली व मुखबा गांव में सेब के सीजन में पहले भालुओं ने फसल को नुकसान पहुंचाया। अब बगीचों में लंगूरों के उत्पात से काश्तकार परेशान हैं। मुखबा के योगेश सेमवाल, जसपुर के मानेंद्र रौतेला, हर्षिल के माधवेंद्र रावत, सौरभ पंवार का कहना है कि लंगूरों द्वारा सेब की पेड़ों की नर्म छाल चट करने से टहनियां सूख जाती हैं। बिना पूंछ वाला जंगली जानवर, कस्तूरा मृग, लंगूर, घुरड़ आदि भी बगीचों में डेरा डालकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। हर साल इसी तरह जंगली जानवरों के नुकसान की वजह से काश्तकारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। वे बताते हैं कि लोग हर साल जितने नए पेड़ बगीचे में लगाते हैं, उसी अनुपात में पुराने पेड़ जंगली जानवर नष्ट कर देते हैं। देखा जाय तो इस मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए न सरकार के पास कोई योजना है और न ही काश्तकारों को इसका कोई हल सूझ रहा है। भटवाड़ी के पूर्व कनिष्ठ प्रमुख संजय पंवार का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला।